Story of Akbar Birbal in Hindi अकबर बीरबल की कहानी

Jharana Sahoo
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story of akbar birbal

Story of Akbar Birbal in Hindi अकबर बीरबल की कहानी Short Story of Akbar Birbal in Hindi 10 हस्यानीय और मजेदार कहानियाँ

अत्मबिश्वास की जीत – Story of Akbar Birbal in Hindi

Story of Akbar Birbal in Hindi: बादशाह Akbar Birbal के साथ राज्य के अच्छे बुरे काम और हाल के बारे में बात करने के अलावा कई अलग बिषय में भी बातचीत किया करते थे. ऐसे ही एक दिन बात करते हुए, बादशाह अकबर के दिमाग मे एक सवाल आया. तो वो बीरबल से पूछे की – वो कौनसी चीज है जो की दुनिया में सबसे जरूरी और कीमती है? दुनिया में सबसे जरूरतमंद और महत्वपूर्ण चीज है इंसान का खुद के ऊपर अ‌ात्मबिश्वास – बीरबल ने जवाब दिया.

बीरबल की यह बात सुनकर बादशाह अकबर उलझन मे पड़ गये. उन्होने मन ही मन में सोचा कि बीरबल की इस बात को वो किसी न किसी दिन आजमाएंगे और देखेंगे कि बीरबल इस बात को साबित कर पाते है कि नहीं. देखते देखते कुछ दिन बित गया.ऐसे ही एक दिन, जंगल की एक हाथी राज्य में घुस गया है और वो किसीके काबु मे नहीं आ रहा है.

लोगों से पूछ ताछ करने पर पता चला कि, वो एक पागल हाथी है.राज्य के कर्मचारियों ने उस हाथी को बेड़ियों मे बांध के पकड़ कर रखे थे. बादशाह अकबर को इसके बारे में पता चलते हि उन्होने कर्मचारियों को आदेश दिया की,अगर तुम्हे इसी रास्ते से बीरबल आता हुआ देखे, तब इस हाथी को बेड़ियों से मुक्त करके उनके सामने छोड़ देना.

Story of Akbar Birbal in Hindi
Story of Akbar Birbal in Hindi

यह बात सुनकर कर्मचारी चिंतित होगये पर वो बादशाह की आदेश को अस्वीकार नहीं कर सकते थे. इसीलिए, जैसे ही उन्होने बीरबल को रास्ते मे आते हुए देखा तो उस बेकबु हाथी को उनके सामने छोड़ दिया. बीरबल को इस बात के बारे में पता नहीं था. तभी उनके नजर चीखते हुए सामने से आने वाली हाथी पर पड़ी.

यह देख कर वो घबरा गये. क्या करें, कहाँ जाये कुछ समझ नहीं पा रहे थे. इतने मे उनको सामने से एक कुत्ता दिखाई दिया. उन्होने अपनी चालक दिमाग लगाया और उस कुत्ते को उठाकर हाथी के ऊपर की तरफ फ़ेक दिया.कुत्ते की चिल्लाने की आवाज़ सुनकर हाथी ने अपना रास्ता बदल दिया.

कुछ देर बाद बादशाह अकबर को बीरबल के इस काम के बारे में पता चला. यह सब देख सुनकर वो समझ गये की आत्मबिश्वाश  ही दुनिया की सबसे कीमती और बड़ी चीज है.

अत्मबिश्वास की जीत – Story of Akbar Birbal in Hindi कहानी से सीख

इंसान के पास अगर अत्मबिश्वाश और उमीद हो तो वह किसी भी परेशानियों से खुद को बचा सकता है.

बेईमानी प्रजा/अंधा भरोसा का नतीजा – Story of Akbar Birbal

Story of Akbar Birbal: एक दिन की बात है. हमेशा की तरह राज्यसभा मे बादशाह अकबर और बीरबल बैठे हुए राज्य की हालचाल के बारे में बात कर रहे थे. ऐसे ही बात करते हुए बादशाह ने बीरबल को एक बात बोले की – बीरबल, हमारे राज्य के सभी प्रजा बहुत अच्छे और भरोसेमंद है.

वो सब ईमान्दारि से अपना काम करते है. लेकिन बादशाह की इस बात मे बीरबल सहमत नहीं हुए और जवाब देते हुए बोले की- बादशाह, आज कल के जमाने मे कोई भी भरोसेमंद और सच्चा नहीं है.

और न ही हमारे सभी प्रजा सच्चा है. बीरबल की यह जवाब सुनकर बादशाह नाखुश होते हुए बोले-  बीरबल, तुम ऐसे केसे बोल सकते हो की हमारे प्रजा अच्छे और भरोसायोग्य नहीं है. “बादशाह , में सच बोल रहा हूँ. आप का अगर इजाजत मिलेगा तो में इस बात को जाँच करके प्रमाण कर सकता हूँ. बीरबल ने जवाब दिया.

बहुत गहराई से बादशाह बीरबल की इस बात को सोचा और साबित करने का मौका दिया. बादशाह के आदेश मिलते ही, बीरबल प्रजाओं को धोकेबाज़ और कपटी साबित करने के लिए तरह तरह की उपाय सोचने लगे. उन्होने सोचा कि, लोग सबके सामने धोकेबाजी नहीं करेंगे.

इसीलिए कुछ ऐसे करना होगा की प्रजाओं का कपट और धोखा बादशाह के सामने आजाये और प्रजाओं को इस बात का पता भी न चले. बहुत सोचने के बाद, बीरबल राज्य के कर्मचारियों के द्वारा घोसणा किया की – बादशाह अकबर, एक बहुत बड़ी दावत की ब्यबस्था कर रहे और उसमें वो अपनी सभी प्रजाओं का सामिल होने की इच्छा रखते है.

Story of Akbar Birbal

बस आप सब को इतना करना है की एक छोटे पात्र मे दूध लाना है और पास रखे हुए पतीले मे डालना है.थोड़े से दूध के बदले मे दावत मिलने की बात सुनकर सारे प्रजा खुस होगये. उसके बाद जगह जगह पर बड़े बड़े पतीले रखा गया. राज्य की आबादी को देखते हुए, उसके अनुसार पतीले रखे गए.

हर एक प्रजा की मन में यह बात चल रहा था कि, इतने सारे लोगों मे सब पतीले मे दूध डालेंगे, अगर मे दूध के बदले पानी डालदूँ तो किसीको पता नहीं चलेगा. इसी सोच मे अधिकतर लोगों ने दूध के बदले पानी और बहुत पानी मिला हुआ दूध लेकर पतीले मे डालने लगे. दावत खतम होने के बाद, जब बादशाह और बाकी सब पतीले मे भरा दूध की जांच करने चले तो पता चला कि पतीले दूध की परीमाण पानी के हिसाब से बहुत कम है.

इससे यह साबित होता है की ज्यादातर लोगों ने दूध के बदले पतीले में  सिर्फ पानी डाले थे. प्रजाओं की ऐसी हरकत देखकर बादशाह को बहुत दुख हुआ और सोचने लगे कि वो जिन प्रजाओं के उपर इतना भरोषा करते थे, वो सब उस भरोसे के योग्य ही नहीं है . इतना सब कुछ जान कर बादशाह को बीरबल की बात पर यकीन आगया और अंत में बीरबल की बात साबित होगया. (Story of Akbar Birbal)

बेईमानी प्रजा/अंधा भरोसा का नतीजा – Story of Akbar Birbal कहानी से सीख

हर कोई ईमानदार और भरोसायोग्य नहीं होता है. मौका मिलने पर कोई भी धोखा दे सकता है.

दूसरों को बोलने से पहले खुद करना चाहिए – Story of Akbar Birbal in Hindi

Story of Akbar Birbal in Hindi: बादशाह अकबर के राज्यसभा का दृष्य है. वो बहुत चिंतित दिखाई दे रहे थे. चिंता का कारण था उनका बेटा. उसकी अंगूठा चूसने की बुरी आदत थी. बादशाह अकबर ने तरह तरह की तरकीब अपना कर उस आदत को छुड़ाने की बहुत कोशीश की लेकिन राजकुमार के बुरी आदत मे कुछ भी परिबर्तन नहीं हुआ.

एक दिन अकबर राज्यसभा में बैठे हुए होते है, उनको तब एक योगी के बारे में  जानकारी मिली. उस योगी की बात बहुत असरदार है, जिसके प्रभाब मे बहुत जिदखोर इंसान भी अपना जिद छोड़कर सही रास्ता चुनता है.

बादशाह ने उस योगी को राज्यसभा मे आने का आदेश दिया. उनके आते ही अकबर ने कहा – मेरे बेटे को अंगूठा चूसने की एक बुरी आदत है, क्या आप उसे इस आदत से छुटकारा पाने कि कोई इलाज बता सकते है.

राज्यसभा मे बादशाह अकबर, बीरबल, राजकुमार और बाकी सब राज कर्मचारी बैठे हुए थे. योगी ने कुछ भी इलाज बताये बिना एक हप्ते के बाद आने केलिए बोल के वहाँ से चला गया. योगी के यह हरकत, वहाँ बैठे सभी को कुछ ठीक नहीं लगा.

Story of Akbar Birbal in Hindi

वो सब सोचने  लगे की-उस योगी जी ने राजकुमार को देखे बिना और कुछ इलाज बताये बिना क्यों चले गये. एक हप्ता निकल गया. उसके बाद फिर उस योगी जी ने राज्यसभा को आया. राजकुमार से बात करके अंगूठा चूसने पर होने वाली असुबिधाओं के बारे में अच्छे से समझाया.

योगी की बात को राजकुमार समझ गये और वादा किया की, वो आगे से इस बात को ध्यान मे रखेंगे और अंगूठा चुसना छोड़ देंगे. अकबर के समेत राज्यसभा के अन्य सभी कर्मचारी बोलने लगे की – अगर बात सिर्फ इतनी सी थी, तो उस योगी ने पहले क्यों नहीं बताया और बेकार मे राज्यसभा का समय क्यों नष्ट किया.

इसके लिए उसे सजा मिलनी चाहिए. अकबर इस मामले मे बीरबल को अपना राय मांगी. लेकिन बीरबल ने बादशाह के बात से सहमत न होते हुए बोले- क्या आप सभी ने देखा था, वो योगी जब पहली बार राज्यसभा में आया था तो उसको चुना खाने वाली बुरी आदत थी. इसीलिए वो बिना कुछ बोले चला गया था.

क्यों की उसको पता था की उसकी बुरी आदत छुट्ने से पहले, वो किसी और को आदत छोड़ने की सलाह नही दे सकता है. एक हप्ते बाद जब वो वापस राज्यसभा को आया, तब उसकी चुना खाने वाली आदत छुट गयी थी और वो राजकुमार को उनकी बुरी आदत छोड़ने के बारे में समझाया. बीरबल की यह बात सुनकर सबको अपनी गलती का एहसास हुआ और योगी को जैथ‌ोचित् ब्यबहार के साथ सम्मानित किया.

दूसरों को बोलने से पहले खुद करना चाहिए – Story of Akbar Birbal in Hindi कहानी से सीख

किसी के बारे में सत्यता जान ने से पहले, बोलना नहीं चाहिए. दूसरों को उपदेश देने से पहले, खुद करना चाहिए.

बीरबल की चालाकी – Short Story of Akbar Birbal in Hindi

Short Story of Akbar Birbal in Hindi: एक दीन बादशाह अकबर के दरबार में एक बिद्वान मनीषी आये थे. उनका मानना था की वो संसार के सबसे ज्ञानी व्यक्ति है. वह बादशाह को कुछ प्रश्न पूछना चाहते थे लेकिन बादशाह अकबर को उन प्रश्नों का उत्तर सही से पता नहीं था.

इसीलिए उन्होंने उस बिद्वान मनीषी जी को कहा की वह जो भी प्रश्न है, बीरबल को पुछे. क्यों कि बीरबल की ज्ञान की चर्चा पुरी राज्य में है. लोगों का कहना और अकबर को भरोषा है की बीरबल मुश्किल से मुश्किल काम को भी आसान कर सकता है. बीरबल को राज्यसभा में बुलाया गया.

वो बिद्वान ब्यक्ति अपना प्रश्न पूछने से पहले बीरबल को कहा की – ” में तुम्हे चयन करने का एक मौका देना चाहता हूँ. तुम्हे सिर्फ इतना चयन करना है की, में तुम्हे 100 साधारण प्रश्न पूछूँ या फिर, 1 जटिल प्रश्न पूछूँ.” बीरबल की चालाकी से कोई अंजान नहीं है.

Short Story of Akbar Birbal in Hindi

तो उन्होने बोला की – वो एक जटिल प्रश्न का उत्तर देना पसंद करेंगे. उनके बात सुनकर बिद्वान जी ने उस प्रश्न को उनके सामने रखा. उनका सवाल यह था की – मुर्गी और अंडे के बीच कौन दुनिया मे सबसे पहले आया? बीरबल ने उत्तर में कहा की – सबसे पहले मुर्गी दुनिया मे आया.

उस बिद्वान ब्यक्ति ने फिर एक सवाल पूछते हुए कहा – कैसे?  मुर्गी दुनिया में पहले कैसे आया? उनके दूसरे प्रश्न सुनकर, बीरबल ने उनसे कहा की – आप ने सिर्फ एक प्रश्न पूछने केलिये बोला था, तो और एक प्रश्न कैसे पूछ सकते है.

बीरबल की यह बात सुनकर उस बिद्वान पंडित हक्का बक्का रह गया. और अकबर के साथ साथ राज्यसभा मे बैठे हुए सभी लोग खुश होगये. बीरबल की अकल और चालाकी फिर एक बार साबित होगया.

बीरबल की चालाकी – Short Story of Akbar Birbal in Hindi कहानी से सिख

सही समय पर अपना बुद्धि का इस्तेमाल करने से हमें किसी भी समस्या का समाधान मिल सकता है.

बीरबल का बचपना – Story of Akbar Birbal in Hindi

Story of Akbar Birbal in Hindi: एक दिन की बात है, बीरबल राज्यसभा को आने मे ज्यादा समय लग गया. बादशाह अकबर बहुत देर से बीरबल के बीरबल की अपेक्ष्या मे थे. कुछ समय बाद बीरबल राज्यसभा मे आये.

उन्हें देख कर अकबर ने पूछा – बीरबल, आज तुम्हे राज्यसभा को आने मे इतना बिलंब क्यों हुआ ? बादशाह के सवाल का जवाब देते हुए बीरबल ने बोला – जहाँपना, माफ करें.

में समय से घर से निकल रहा था,  लेकिन मेरे छोटे छोटे बच्चों ने रास्ते में आगये और मुझे आगे तक बढ़ने नहीं दिया. बहुत समझा कर उन्हे मेरे रास्ते से हटाया. इसीलिए मुझे आने मे थोड़ा ज्यादा समय लग गया.

बीरबल की यह सब बातें बादशाह को झूट लगा. उन्हें लगा की बीरबल की ज्यादा समय लगने का कारण कुछ और है, बच्चों केलिए इतना देर क्यों होगा. अगर बच्चे रास्ता रोक रहे थे, तो उन्हे समझा कर आना कौनसी बडी बात है. फिर भी वो नहीं माने, तो उनके उपर गुस्सा होकर डांट देने से वो रास्ते से हट जाते.

लेकिन, बीरबल को अच्छे से पता था की – नन्हे नन्हे बच्चों का जिद और भोले भाले प्रश्न का सामना करना इतना आसान नहीं है. फिर भी बादशाह को बीरबल की बातों में भरोसा नहीं हो रहा था.

उनके बातों को यकीन दिलाने केलिए बीरबल ने बादशाह को बोला की – महाराज, छोटे बच्चों को संभालना और समझ‌ाना  कितना मुश्किल है, में यह बात प्रमाण कर सकता हूँ. लेकिन उसके लिए आपको मेरा एक बात मानना होगा. और वो बात यह है की – बीरबल छोटे बच्चों की तरह बर्ताब करेंगे और बादशाह अकबर उन्हें अच्छे से समझाएंगे. बादशाह ने बीरबल की बात मान लिया और वेसा करने केलिए राजी होगये.

कुछ देर बाद, बीरबल बच्चों के जैसे हरकत करने लगे. उनका चीखना और रोना देख कर, बादशाह उनको अपने गोद में ले गये. फिर बीरबल बादशाह के मुँछ को खीचना, तरह तरह के मुँह बनाना, यह सब हरकत करने लगे. इससे बादशाह पर जरा सा भी असर नहीं पड़ रहा था.

कुछ समय बाद, बच्चा बना हुआ बीरबल जिद करने लगे की, उन्हें गन्ना खाना है. बादशाह ने आदेश देकर बीरबल के लिए गन्ना लाये. फिर बीरबल ने जिद करके कहा कि – मुझे गन्ने का छिला उतार कर दो. उनके जिद के अनुसार एक सेवक ने गन्ने का छिला उतार के उन्हें दिया.

Story of Akbar Birbal in Hindi

अब बीरबल चिल्लाते हुए जिद करने लगे की – मुझे ऐसा गन्ना दो, जो छोटे छोटे टुकड़े मे कटा हुआ हो. उनके हिसाब से गान्नो को छोटे छोटे करके कटा गया. लेकिन बीरबल ने उसे फ़ेक दिया. फेंका हुआ गन्ना देख कर बादशाह, बीरबल के उपर गुस्सा होगये और जोर से डांट ने लगे.

इससे बीरबल जोर् जोर् से चिला कर रोने लगा. अकबर ने सांत होकर बीरबल से पूछा – रो मत बीरबल, क्या चाहिये बोलो? बीरबल ने कहा – मुझे एक बहुत लम्बा गन्ना चाहिये. उनके लिए लम्बा सा गन्ना लाया गया. लेकिन बीरबल ने उसकी तरफ देखा भी नहीं.

बीरबल की ऐसे हरकत देख अकबर को और ज्यादा गुस्सा आगया, वो चिल्लाकर बीरबल से पूछे – अब तुम्हे क्या हुआ? बीरबल रो रो कर बोले – मुझे लम्बा गन्ना चाहिए लेकिन वो इस छोटे छोटे टुकड़ों से बनाया होना चाहिये. बीरबल की इस तरह की बात सुनकर अकबर अपने सिर पर हाथ रख कर थाम कर बैठ गये.

बादशाह के इस हालत देख कर, बीरबल ने बच्चों जैसे हरकत करना बंद कर दिया और उनसे जाकर बोले –  आपको इतना परेशान करने केलिए क्षमा चाहता हूँ. लेकिन छोटे बच्चों को संभलना और समझाना कितना मुश्किल है, आपको ये बात समझाने केलिए मुझे यह सब करना पड़ा. अकबर भी बीरबल के बात मान कर उनके बातों से सहमत हुए.

बीरबल का बचपना – Story of Akbar Birbal in Hindi कहानी से सिख

छोटे बच्चों को समझाना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन उनको लाड प्यार से बात करके समझाया जा सकता है.

किसीको नीचा दिखाना गलत है / बीरबल की इम्तिहान – Story of Akbar Birbal in Hindi

Story of Akbar Birbal in Hindi: एक दिन की बात है. राज्यसभा में बादशाह अकबर और बीरबल के समेत सभी राज्य कर्मचारी बैठे हुए थे. राज्यसभा में राज्य के साथ साथ प्रजाओं के समस्याओं के बारे मे कारबाई हो रही थी. इसी समय वहाँ एक आदमी हाथ मे एक मिट्टी के घडा लेते हुए आया. सबकी नजर उस घड़े पर पड़ी.

उसे देख कर  बादशाह अकबर ने पूछा – यह घडा यहाँ पर क्यों लाये हो? क्या है इसमें? बादशाह के सवाल का जवाब देते हुए उस आदमी ने कहा – महाराज, में इस मिट्टी के घड़े मे चीनी और रेत को मिलाकर लाया हुँ.

फिर बादशाह उसको पूछे – लेकिन यह सब मिलाकर यहाँ क्यों लाये हो? माफी चाहता हूँ महाराज, लेकिन में यह सब बीरबल के लिए लाया हूँ. – उस आदमी ने जवाब दिया. उस आदमी ने कहा की – में बीरबल की चालाकी और बुद्धिमानी के बारे में बहुत सुना हुँ.

आज में उनकी बुद्धिमानी की इम्तिहान लेना चाहता हूँ. इस बात को साबित करने केलिए बीरबल को चीनी और रेत अलग अलग करना होगा. उस आदमी की यह बातें सुनकर राज्यसभा में बैठे हुए सब लोग सोच में पड़ गये.

वो सब बात करने लगे की – भला, रेत से चीनी को कैसे अलग किया जा सकता है! लेकिन बीरबल तो बहुत चालाक है, वो उस आदमी की बात में राजी होगये. रेत और चीनी मिलाकर रखा गया मिट्टी के घड़े को अपने साथ लेकर बीरबल राज बगीचे की ओर चले.

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उनके पीछे उस आदमी के साथ साथ बाकी सब लोग भी चलने लगे. वो सब सोचने लगे की – बीरबल इस घड़े को लेकर कहाँ जा रहे है. और वो ऐसा क्या करने वाले है, जिससे रेत और चीनी दोनों अलग अलग होजाएगी और बीरबल की बुद्धिमानी भी साबित होजायेगी.

वहाँ राज बगीचे मे एक आम का पेड था. बीरबल उसके पास गये और मिला हुआ चीनी और रेत को उस पेड की चारों तरफ बिछाने लगे.

यह सब देख कर उस आदमी ने पूछा – ऐसा क्यों कर रहे हो, यह करने से क्या होगा? बीरबल ने जवाब मे कहा – तुम जरा सबर करो, क्या होगा यह तुम्हे कल सुबह पता चलेगा. अगले दिन सुबह सब उस आम की पेड के पास चले. सबने देखा की वहाँ सिर्फ रेत पड़ा है .

यह देखते ही उस आदमी के साथ साथ बाकी सबने ने बीरबल से पूछा – यहाँ तो सिर्फ रेत पड़ा है लेकिन चीनी कहाँ गया और यह सब कैसे हुआ? बीरबल ने बोला – रेत मे मिला हुआ चीनी को चीटियाँ ले गये.

चीनी को पाने के लिये तुम्हे चीटियों के बिल तक जाना होगा. रेत से चीनी को अलग करना मेरा काम था जो कि मैं ने करदिया. बीरबल की यह चालाकी काम को देख कर वो आदमी हैरान होगया और बादशाह अकबर के साथ साथ बाकी सब लोग खुश होगये.

किसीको नीचा दिखाना गलत है / बीरबल की इम्तिहान – Story of Akbar Birbal in Hindi कहानी से सिख

किसीको नीचा दिखाना और नीचा दिखाने की चेष्टा करना सही बात नहीं है.

समय का सही उपयोग – Story of Akbar Birbal in Hindi

Story of Akbar Birbal in Hindi: एक दिन की बात है. बादशाह अकबर रोज की तरह अपने राज्यसभा मे बैठे हुए थे. उनके साथ राज्य कर्मचारियों भी बैठे हुए थे. इसी समय बादशाह अकबर के मन मे एक बात आया.

वो बीरबल को बोले की – बीरबल, तुम्हारे लिए एक काम है, तुम्हे मेरे सामने ५ ऐसे ब्यक्ति को लाना है, जो बहुत अज्ञान तथा मुर्ख हो. बादशाह के आदेश को स्वीकार करते हुए बीरबल ने  कहा – महाराज, आपका काम होजाएगा, लेकिन उसके लिए मुझे एक महीने की जरूरत है.

बादशाह भी बीरबल के कहने पर उन्हें एक महीने की समय दिया. एक महिना बित गया. उसके बाद बीरबल अपने साथ ३ ब्यक्ति को लेकर राज्यसभा मे उपस्थित हुए.

अपने साथ सिर्फ ३ लोगों को देख कर बादशाह बीरबल से पूछे – बीरबल, मैने तो तुम्हे ५ बुद्धु इंसान को अपने साथ लेकर आने को आदेश दिया था, तुम सिर्फ ३ लोग को लेकर कैसे आ गये? बीरबल ने बादशाह की बात सुनकर बोला – महाराज, आप जरा सबर तो कीजिये, मे ५ मुर्खो की ही लेकर आया हूँ.

कुछ समय बाद आपको बाकी २ मुर्ख के बारे में भी पता चल जायेगा. फिर बादशाह अकबर ने कहा, ठीक है. लेकिन यह ३ लोगों की मूर्खता के बारे में भी तो बताओ. तुम्हे कैसे पता चला की, यह ३ बहुत बड़े मुर्ख है.

बीरबल पहले आदमी की ओर देखते हुए बोले – महाराज, में जिस रास्ते से जा रहा था यह आदमी भी उसी रास्ते में अपने गधे के ऊपर बैठे हुए जा रहा था.

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लेकिन उसने अपने सामान को अपने सिर पर रखा था. में ने जब उसे पूछा की तुम अपने सामान को गधे के रखने की वजह खुद के सर पर क्यों रखे हो. तब इस आदमी ने मुझे बोला की,

साहब मेरा गधा कमजोर है, अगर में इसके उपर सामान रखूं तो ये और भी कमजोर हो जायेगा. इसीलिए में अपने सामान को सर पे रखे ले जा रहा हूँ. इन हरकत के वजह से मुझे लगा की यह आदमी बहुत बड़ा बुद्धू है.

उसके बाद बीरबल दूसरे ब्यक्ति की तरफ देखा और बोला – महाराज, इसका नाम जग्गू है. में ने रास्ते मे देखा की यह आदमी बहुत परेशान होके कुछ ढूंढ रहा था. उसको परेशानी मे देख के मेने पूछा-  भाई साहब, क्या हुआ है? इतना परेशान होकर क्या ढूंढ रहे हो.

तब इस आदमी ने बोला की – मेरे सोने की अंगूठी कहीं गिर गया है. उसे ढूंढ रहा हूँ. फिर बीरबल ने उसे पूछा की, क्या आप जानते हो आपकी अंगूठी कहाँ गिर गया था. इस आदमी ने बोला – हाँ, यहाँ से कुछ दूर मे एक पेड है, मेरा अंगूठी वहाँ गिरा था.

लेकिन वहाँ बहुत अंधेरा है इसीलिए में अपना अंगूठी यहाँ ढूंढ रहा हूँ. इसके बातें सुनकर बीरबल ने सोचा कि – मुझे और एक मुर्ख इंसान मिलगया. फिर तीसरे ब्यक्ति की बारी आई. अकबर ने बीरबल से पूछा अब इसने क्या किया है. बीरबल  बोले, – बादशाह, इसने गाय को अपने छत के ऊपर चढ़ा कर घास खिला रहा था, क्यों की इनके छत मे बहुत घासफुस होगया था.

जब की यह उन घास को काट कर गायों को खिला सकता था, पर यह खुद उस गायों को जबरदस्ती छत के ऊपर ले जा रहा था. अब आप खुद बताओ, यह मुर्ख है की नहीं. इन तीनों मुर्ख के बारे मे सुनने के बाद बादशाह ने बीरबल से पूछा – और २ मुर्ख कौन है और कहाँ है? बीरबल ने मुस्कुराते हुए बोला- जहाँपना, बाकी के २ मुर्ख हम दोनों है.

क्यों की आप वेवाजह मुझे बेकार मे मुर्ख लोगों को ढूंढ ने केलिए बोला और में भी आपके आदेश मान अपना एक महिना ईन बुद्धू लोगों को ढूंढने मे बर्बाद करदीया. बीरबल की बात मे सब सहमत हुए और जोर जोर से हसने लगे.

समय का सही उपयोग – Story of Akbar Birbal in Hindi कहानी से सिख

समय बहुत मुल्यबान  है, उसे हमें मूल्यहीन काम करके नष्ट नहीं करना चाहिए.

पैसों की मटकी – अकबर बीरबल की कहानी

अकबर बीरबल की कहानी : बीरबल एक प्रकृति प्रेमी आदमी था. खुली हवा, पेड़ पौधों के बीच में ज्यादा समय बिताना उन्हे अच्छा लगता था. बादशाह अकबर के उद्यान उनका पसंदीदा जगह था, जहाँ वो ज्यादा समय घुमा करते थे. उस उद्यान का रख रखाव करने के लिए एक आदमी को रखा गया था. उसका नाम रामु था. वो बहुत अच्छा और मासूम आदमी था.

उसका ब्यबहार  भी बहुत अच्छा था. कभी कभी बीरबल और रामु बगीचे मे बैठ के पेड़ पौधों के बारे मे भी बात किया करते थे. एक दिन बीरबल बगीचे मे टहल रहे थे. उन्होंने देखा की रामु परेशान हो कर रो रहा है.

बीरबल उसके पास जा कर परेशानी के कारण पूछे. रामु ने रोते हुए कहा – में सुरुवात से आजतक हमेशा मुझे मिला हुआ पैसों को मटके मे भरके इसी बगीचे मे एक पेड़ के नीचे रखा करता हूँ.

लेकिन आज जब देखा, तो मटकी वहाँ नहीं है. रामु की बात सुनकर बीरबल उसे पूछे – तुम अपने पैसे को घर पर न रख कर यहाँ बगीचे मे क्यों रखते थे. फिर रामु ने बोला – मे तो घर से ज्यादा समय, यहीं बगीचे बिताता हुँ.

इसीलिए मे ने सोचा की, अगर यहाँ अपने पैसों को रखूं तो यह मेरे नजर मे रहेगा और सुरक्षित भी रहेगा. मुझे क्या पता था, मेरे पैसे अचानक ऐसे चोरी होजायेंगे. रामु को समझाते हुए बीरबल ने कहा – तुम चिंता मत करो, तुम्हारे पैसे किसने चोरी की है, उसे मे पकड़ कर तुम्हे तुम्हारा पैसा वापस दिलाऊंगा.

फिर बीरबल बादशाह अकबर के पास जाकर उन्हे सारी बात बताया. और उस पैसे चोरी करने वाला को पकड़ ने का इजाजत मांगा. बादशाह से इजाजत मिलते ही, बीरबल ने राज्यसभा मे सारे राज कर्मचारियों को बुलाया. वो सभी को पूछ ताछ करने लगे. उन्होंने पूछा – क्या आप सभी मे से किसीका तभीयत खराब था या फिर किसने कोई दवाई ली थी.

उनके प्रश्न का जवाब देते हुए एक कर्मचारी ने बोला की – मुझे हल्का सा बुखार हुआ है, और उसके लिए मेरी पत्नी अपने हाथों से एक दवाई बना कर दे रही है. में उस दवाई को खा रहा हूँ.

अकबर बीरबल की कहानी

उनके बात खतम होने के बाद दूसरे कर्मचारी ने बोला की – मुझे कब्ज की बीमार है और उसके इलाज के लिए  इस राज्य के एक बैद्य मुझे दवाई दे रहे है. इनके बात सुनकर बीरबल ने बोला – क्या बुलाने पर वो बैद्य यहाँ राज्यसभा मे आयेंगे. उस आदमी ने हाँ मे जवाब दिया.

कुछ समय बाद बैद्य जी  राज्यसभा मे आ पहुंचे. उन्हें देख कर बीरबल ने उनसे पूछा – बैद्य जी, मुझे बहुत दिनों से कब्ज की बीमार है, क्या आप उसके इलाज के लिए मुझे कुछ दवाई देंगे. आपके दवाई के बारे मे मंत्री जी से सुना था. शायद आपके दवाई से मेरा कब्ज सही होजाएगा. (अकबर बीरबल की कहानी)

मेरी दवाई से अगर आपका कब्ज ठीक होजाएगी तो मुझे बहुत खुशी होगी – बैद्य जी ने कहा. बीरबल उनसे पूछे की – आप इस दवाई को कैसे बनाते हो और इसमें क्या क्या चीजों की जरूरत पड़ती है, क्या आप मुझे यह बता सकते हो.

बैद्य ने कहा – आप पूछ रहे हो इसीलिए बता रहा हूँ, लेकिन हर किसी को में यह सब नहीं बताता. इस दवाई को बनाने केलिए एक स्वतंत्र पेड़ की जड़ चाहिए. बीरबल ने कहा – यह तो बड़ी दुबिधा की बात होगयी.

अब इस स्वतंत्र पेड़ कहाँ मिलेगा. बैद्य जी ने कहा – आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, वो स्वतंत्र पेड़ राज बगीचे मे है. जिससे मे आपके लिए दवाई बना दूंगा. उनके बातें सुनकर बीरबल ने कहा – बैद्य जी, में आपको एक मौका दे रहा हूँ. आपने गलती मान लीजिये और पेड़ के नीचे से लाया हुआ पैसा लौटा दीजिये. यह पैसा बगीचे मे काम करने वाला रामु का है.

बैद्य जी ने कहा- हुजूर, मुझे क्ष्यमा कर दीजिये, उस पेड़ के नीचे से जड़ लाते समय पैसों से भरा हुआ घडा देख कर मुझे लालच आगया था. इसीलिए उस घड़े को में ले आया.

इस काम केलिए में माफी चाहता हूँ. ऐसा बोल कर बैद्य ने उस घड़े को बीरबल को वापस कर दिया. लेकिन वो उसमे से १० सिक्का निकाल कर बैद्य जी को दिया, क्यों उन्होंने झुट न बोलकर अपना गुनहा को कुबूल किया था. और उस घड़े को रामु को दे दिया. बीरबल की न्यायोचित काम और बुद्धि को देख कर सब उनसे खुश हो कर उनके वा वहाइ कि. (अकबर बीरबल की कहानी)

पैसों की मटकी – अकबर बीरबल की कहानी से सिख

किसी और के चीजों मे लालच करना गलत बात है.

सच्चाई की परीक्षा – Story of Akbar Birbal in Hindi

Story of Akbar Birbal in Hindi: बादशाह अकबर के राजप्र‌ासाद मे बहुत सारी चीजें थे, जो प्रासाद की सुंदरता को और भी बढ़ा देता था. उसमें से एक गुलदस्ता था, जिससे अकबर बहुत पसंद करते थे और उसे हमेशा अपने पलंक के पास रखा करते थे.

एक दिन की बात है, एक सेवक अकबर के कक्षा की साफ सफाई कर रहा था. गलती से उसका हाथ उस गुलदस्ता से टकरा कर नीचे गिर गया और टूट गया. टूटे हुए गुलदस्ता को देख कर वो परेशान होगया.

क्या करें क्या नहीं उसे कुछ समझ मे नहीं आ रहा था. वो बहुत कोशीश करने के बाद भी उस गुलदस्ता को जोड़ नहीं पाया. टूटे हुआ गुलदस्ता को लेकर कुडे फेकने वाले जगह पर फेक दिया.

कुछ समय बाद, जब अकबर अपने कक्ष मे आये, तब उन्होंने देखा की पलंक के पास उनका प्रिय गुलदस्ता नहीं है. उन्होंने सेवक बुलाया और गुलदस्ता के बारे मे पूछा की – यहाँ रखा हुआ गुलदस्ता कहाँ गया.

परेशान हो कर उस सेवक ने डर के मारे बोल दिया की – महाराज, वो गुलदस्ता ज्यादा मैला होगया था इसीलिए उसे अच्छे से साफ करने के लिए मे घर ले गया हूँ. बादशाह को उसके बात पे शक हुआ और जल्द ही गुलदस्ता लाने के लिए बोला.लेकिन टूटा हुआ गुलदस्ता वो कहाँ से लायेगा.

इसीलिए उसे सच बोलना पड़ा की – कक्षा को साफ करते समय, हाथ से टकरा कर वो गुलदस्ता टूट गया था. सेवक से यह सब सुनकर, बादशाह को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने झुट बोलने के लिए उस को मृत्यु की सजा दे दिया.

इस मामले मे अगले दिन राज्यसभा मे बात किया गया और सारे मंत्रिगणों को उनके राय के बारे मे पूछा गया. सब अकबर के बात मे सहमत हो गये.

Story of Akbar Birbal in Hindi

लेकिन बीरबल को बादशाह के यह फेैसला सही नहीं लगा. उन्होंने अकबर को कहा – झुट बोलने के लिए मृत्यु की सजा देना गलत है. ऐसा‌  कोई भी सच्चा इंसान नहीं है जिसने कभी झूट न बोला हो.

बीरबल के बात को अकबर के साथ साथ सारे कर्मचारियों ने भी इनकार किया और बोलने लगे हमने कभी भी झुट नहीं बोला है. सबके बात सुनकर बादशाह akbar birbal  को राज्यसभा से निकाल दिया.

इसके बाद बीरबल ने खुदको वादा किया की – उन्हें, उनकी बात को सच साबित करना है की दुनिया मे ऐसा कोई भी नहीं है, जिसने कभी भी झुट न बोला है.

अपने बात को सही साबित करने के लिए उन्होंने एक उपाय सोचा. वो एक सुनार के पास गये और उनसे कहा की – तुम मेरे लिए कुछ छोटे छोटे सोने की बलि बना दो जो बिलकुल गेहूँ तरह दिखता हो. फिर वो उस सोने की बालियों को लेकर राज्यसभा मे पहुंचे.

उन्हें देख कर बादशाह अकबर ने पूछा- अब तुम यहाँ क्यों आये हो, यहाँ तुम्हारा क्या काम है? बीरबल ने कहा- महाराज, आज यहाँ एक चमत्कार होने वाला है, लेकिन उसके लिए आपको मेरे बात मानना पड़ेगा. अकबर , बीरबल के बात मे राजी होगये.

फिर बीरबल बोले – आज रास्ते मे आते समय एक बहुत बड़े योगी पुरुष ने मेरे हाथ मे कुछ सोने के गेहूँ के दाने देते हुए कहा – इस सोने की गेहूँ को तुम जहाँ भी लगाओगे वो जमीन सोने की फसल से भर जायेगी, लेकिन लगाने वाला सच्चा होना चाहिए, जिसने कभी झुट न बोला हो.

बीरबल की यह बात सुनकर कर, सब पीछे हट गये. यह सब देखते ही बीरबल ने खुद अकबर को वो काम करने के लिए कहा, लेकिन अकबर ने मना किया. उन्होंने कहा – में ने भी बचपन मे झुट बोला है. में यह काम नहीं कर सकता हूँ.

अंतः मे अकबर समझ गये की – संसार मे ऐसा कोई भी नहीं है जिसने कभी झुट न बोला हो, हमेशा सिर्फ सच ही बोला हो.

सच्चाई की परीक्षा – Story of Akbar Birbal in Hindi कहानी से सिख

झुट बोलना सही नहीं है, अगर कुछ झूट से किसीका अच्छा हुआ हो तो माफ करदेना सही है.

चोर या चुड़ैल – Story of Akbar Birbal

Story of Akbar Birbal: एक दिन की बात है. रात का समय है, बादशाह अकबर अपने कमरे मे सोने जा रहे थे. वो कमरे मे जाकर सोने ही वाले थे की उन्हें एक आवाज सुनाई दी. उन्होंने झाक कर देखा की जहाँ से आवाज आ रहा था, वहाँ कोई नहीं था. कोई बिल्ली होगा समझ कर अकबर सोगये.

कुछ देर बाद उन्हें फिर कुछ आवाज सुनाई दिया और वो फिर से उठगये. जहाँ राज महल का सारा धन रखा जाता है, उनकी नजर उसकी और पड़ी. वहाँ एक चुड़ैल देख कर बादशाह डर गये और अपना होस् खो बैठे.

अगले दिन सुबह होने पर राज्यसभा मे इस के बारे मे बादशाह से सबको बताया. अकबर की बात सुनकर, बीरबल को सक हुआ की, शायद बादशाह वहम मे है.

जिस जगह बादशाह ने वो चुड़ैल देखा था, वहाँ जाकर देखने से पता चला की वहाँ से कुछ धन कम होगया है. जहाँ सारा धन रखा जाता है, वहाँ कोई चुड़ैल नहीं चोर गया होगा- बीरबल मन ही मन सोचने लगे. फिर वो बादशाह से बोले- ठीक है महाराज, अगले बार से आपको वो चुड़ैल नहीं दिखेगा.

Story of Akbar Birbal

बीरबल सोचने लगे की जो चोर महल में आया था, चोरी किया गया धन खतम होने के बाद वो फिर से जरूर आयेगा. कुछ दिन बाद वैसा ही हुआ, चोर फिर से महल मे घुसा. उसी दिन पहले से ही बीरबल चुड़ैल बन कर वहाँ छुपे हुए थे, जहाँ धन रखा जाता है.

जब वो चोर चुड़ैल बनके महल मे आया,  वहाँ चुड़ैल बने हुए बीरबल को देख कर वो डर गया. उसे देखते ही बीरबल उसको ने पकड़ लिया और जोर से चोर चोर चिलाने लगे.

उनके आवाज से सब जाग गये और उनकी और भागे चले. वहाँ जाकर देखा, बीरबल एक चोर को जोर से पकड़ के रखा है, जो चुड़ैल बन कर महल मे चोरी करने आया था और जिसको बादशाह चुड़ैल समझ बैठे थे.

बीरबल की चतुराई देख कर अकबर खुश हुए और उस चोर को बंदी बना दिया. (Story of Akbar Birbal)

चोर या चुड़ैल – Story of Akbar Birbal कहानी से सीख

चोर कितना भी चालक हो, एक दिन पकड़ ही जाता है.

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